अजा एकादशी 2025: भगवान विष्णु की पूजा से मिलेगा मोक्ष, जानें तिथि, व्रत विधि और दीपदान का महत्व

दिल्ली / – भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी अत्यंत पवित्र और मोक्षदायिनी मानी गई है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करने और व्रत रखने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं तथा उसे जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। ‘अजा’ शब्द का अर्थ है – जो कभी जन्म न ले, अर्थात अविनाशी। इसी कारण इस एकादशी का नाम ‘अजा एकादशी’ पड़ा, क्योंकि यह साधक को अविनाशी सुख और परम मुक्ति की ओर ले जाने वाला व्रत माना जाता है।
एकादशी की तिथि और व्रत का समय

पंचांग के अनुसार अजा एकादशी की शुरुआत सोमवार, 18 अगस्त की शाम 5 बजकर 22 मिनट से हुई और यह तिथि मंगलवार, 19 अगस्त दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर अजा एकादशी का व्रत 19 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 52 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 57 मिनट पर होगा। वहीं, चंद्रमा का संचार मिथुन राशि में रहेगा और आर्द्रा नक्षत्र 20 अगस्त की सुबह 1 बजकर 7 मिनट तक विद्यमान रहेगा।

पूजन विधि और विधान

अजा एकादशी के दिन प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने का विधान है। श्रद्धालु पीला चंदन, पीले पुष्प, पीले फल और तुलसी दल भगवान को अर्पित करते हैं। जलाभिषेक कर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ और ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना गया है। व्रत का संकल्प लेकर अजा एकादशी की कथा का श्रवण अथवा पाठ करने के बाद आरती की जाती है। इसके उपरांत प्रभु को तुलसी पत्ती से युक्त नैवेद्य और भोग अर्पित कर व्रतधारी शाम को फलाहार करते हैं। इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।

दीपदान और तुलसी पूजन का महत्व

ज्योतिष परंपरा के अनुसार अजा एकादशी पर तुलसी के पास दीपक जलाना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु तुलसी पर 11, 21 या 51 दीपक जलाकर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करते हैं। इसके अलावा घर के बाहर और पीपल के पेड़ के नीचे भी घी का दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन की बाधाएं समाप्त होती हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

शुभ मुहूर्त और काल

अजा एकादशी के दिन पूजा के लिए कई विशेष मुहूर्त माने गए हैं। चर, लाभ, अमृत और शुभ काल दिनभर अलग-अलग समय पर पड़ेंगे, जिनमें पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:58 से 12:51 तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:35 से 3:27 तक रहेगा। गोधूलि बेला का समय भी पूजा और दीपदान के लिए उत्तम माना गया है। हालांकि राहुकाल दोपहर 3:40 से 5:19 तक रहेगा, इस दौरान किसी भी शुभ कार्य से बचना चाहिए।

भोग और प्रसाद

अजा एकादशी पर भगवान विष्णु को गुड़, चने की दाल, सूखे मेवे, फल, पंचामृत, मिठाई, मिश्री और केसर या बादाम की खीर का भोग लगाने की परंपरा है। इन नैवेद्यों को तुलसी पत्ती के साथ अर्पित करने पर व्रती को विशेष पुण्य फल मिलता है।

अजा एकादशी का व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक महत्व के कारण भी अत्यंत फलदायी माना गया है। यह दिन भक्ति, श्रद्धा और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। जो भक्त पूरे विधि-विधान से इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करते हैं, उनके जीवन से पाप कर्म नष्ट होकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।            ब्युरो रिपोर्ट

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