एमसीबी | 11 जनवरी 2026
घने वनों की गोद में, पहाड़ियों की ऊँचाइयों पर स्थित सिद्ध बाबा धाम आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, इतिहास और विकास की संयुक्त पहचान बन चुका है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर यह धाम श्रद्धालुओं की आस्था से सराबोर हो उठता है और पूरा क्षेत्र धार्मिक मेले के स्वरूप में तब्दील हो जाता है।

शांत वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य और शिव भक्ति का अद्भुत संगम सिद्ध बाबा धाम को विशिष्ट बनाता है। रात्रि के समय जब भव्य शिव मंदिर रोशनी से आलोकित होता है, तो पहाड़ी पर स्थित यह धाम किसी दिव्य लोक से कम प्रतीत नहीं होता।
खनन क्षेत्र से आस्था स्थल तक का सफर
जिले के पुरातत्व एवं पर्यटन मामलों के जानकार तथा नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडेय के अनुसार सिद्ध बाबा धाम का इतिहास वर्ष 1928 से जुड़ा हुआ है। उस दौर में कारीमाटी क्षेत्र (वर्तमान झगड़ाखांड) में कोयला खनन की शुरुआत हुई थी। खनन कार्य के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार से आए श्रमिकों ने पहाड़ी पर खुले में स्थित शिवलिंग की पूजा-अर्चना आरंभ की।
समय के साथ यह स्थान साधु-संतों और तपस्वियों की साधना स्थली बन गया। दुर्गम रास्तों और घने जंगलों के कारण प्रारंभिक वर्षों में यहाँ पहुँचना आसान नहीं था, लेकिन निरंतर आराधना और जन-आस्था ने इसे ग्राम देवता के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया।
जनसहयोग और प्रशासन से मिला नया स्वरूप
स्थानीय मंदिर समिति, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के सहयोग से सिद्ध बाबा धाम की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। जिला प्रशासन की पहल पर यहाँ
- विद्युत व्यवस्था
- पेयजल सुविधा
- सीढ़ियाँ
- चबूतरे एवं अन्य आधारभूत सुविधाएँ
विकसित की गईं। केदारनाथ धाम की तर्ज पर बने भव्य मंदिर ने इस स्थल को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाया है।
मकर संक्रांति पर आस्था का महासंगम
मकर संक्रांति के दिन सिद्ध बाबा धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। तिल-गुड़ अर्पित कर भक्त भगवान शिव से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिर समिति द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी वर्गों के लोग एक साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं।
मेले में पूजा सामग्री, प्रसाद, पारंपरिक व्यंजन, खिलौने और तिल-गुड़ से बने व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र उत्सवमय हो जाता है।
दो राज्यों की साझा आस्था
मध्यप्रदेश की सीमा से लगे होने के कारण सिद्ध बाबा धाम में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश—दोनों राज्यों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुँचते हैं। इस दौरान पुलिस एवं जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं।
धार्मिक पर्यटन की नई पहचान
आज सिद्ध बाबा धाम न केवल एक आस्था स्थल है, बल्कि जिले के लिए धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाओं का केंद्र भी बन चुका है। मकर संक्रांति पर उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में यह धाम जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊँचाई देगा।





