एमसीबी। जो व्यक्ति समाज में सकारात्मक बदलाव और नव निर्माण की सोच रखता है, वही सच्चे अर्थों में युवा कहलाता है। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मनेन्द्रगढ़ द्वारा श्याम रेजिडेंसी में आयोजित युवा उत्सव कार्यक्रम में वक्ता विजेन्द्र शुक्ला (गुरुकुल एकेडमी, बिलासपुर) ने व्यक्त किए।
अपने संबोधन में श्री शुक्ला ने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है, जहां लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवाओं की है। उन्होंने कहा कि देश ने इतिहास में कई युद्ध भले ही हारे हों, लेकिन सांस्कृतिक रूप से भारत कभी पराजित नहीं हुआ। हमारे संस्कार, नैतिक मूल्य और मानवीय गुण आज भी मजबूत हैं।
उन्होंने भारतीय पारिवारिक व्यवस्था को विश्व की सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था बताते हुए कहा कि आधुनिक सामाजिक बदलावों के कारण यह कमजोर होती जा रही है। इसे मजबूत बनाए रखने के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि परिवार सप्ताह में कम से कम एक दिन साथ बैठकर भोजन करे, एक दिन आपसी संवाद के लिए निकाले और नियमित रूप से मंदिर जाए। इससे परिवार सशक्त होगा और मजबूत परिवार से ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण होगा।
कार्यक्रम के दौरान ‘अमृत वचन’ सत्र में डॉ. रश्मि सोनकर ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को साझा करते हुए युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानें, स्वयं को सुदृढ़ बनाएं और पूरी निष्ठा के साथ समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा में जुटें। उन्होंने कहा कि भारत के विकास का मार्ग त्याग और सेवा से होकर गुजरता है।

युवा उत्सव के अंतर्गत विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। पुरुष वर्ग की टीम का नेतृत्व अंकित शर्मा और आकाश दुआ ने किया, जबकि महिला वर्ग की टीम का नेतृत्व डॉ. रश्मि सोनकर ने संभाला।





