खेत से खाते तक भरोसे की फसल समय पर भुगतान ने बदली किसान दुर्गाप्रसाद की तस्वीर, चेहरे पर लौटा आत्मविश्वास

 

एमसीबी | 02 जनवरी 2026

छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 किसानों के जीवन में केवल एक और फसल चक्र नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा की नई शुरुआत बनकर उभरा है। राज्य सरकार की पारदर्शी, तकनीक आधारित और किसान-केंद्रित धान खरीदी व्यवस्था ने वर्षों से चली आ रही असमंजस और अनिश्चितता को समाप्त कर दिया है। अब किसान पूरे भरोसे के साथ उपार्जन केंद्र तक अपनी फसल लाता है, क्योंकि उसे यह विश्वास है कि उसकी मेहनत का पूरा मूल्य समय पर और सीधे बैंक खाते में मिलेगा।

खेती से जुड़ा संघर्ष, अब बन रहा उम्मीद की कहानी

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम बरमपुर निवासी किसान दुर्गाप्रसाद पिता कंचनराम इस बदली हुई व्यवस्था की जीवंत मिसाल हैं। वर्षों से खेती करते आ रहे दुर्गाप्रसाद ने मौसम की मार, बढ़ती लागत और बाजार की अस्थिरता के बावजूद कभी खेती से मुंह नहीं मोड़ा।
इस वर्ष प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी की नीति और 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य ने उनके भीतर स्थायित्व और सुरक्षा का नया भरोसा पैदा किया। उनके लिए यह सिर्फ आमदनी नहीं, बल्कि सरकार द्वारा उनकी मेहनत को दिया गया सम्मान था।

खड़गवां उपार्जन केंद्र पर दिखी बदली हुई व्यवस्था

तुहर टोकन 24×7’ प्रणाली के तहत निर्धारित तिथि पर टोकन प्राप्त कर जब दुर्गाप्रसाद खड़गवां उपार्जन केंद्र पहुंचे, तो उन्हें पहले से बिल्कुल अलग माहौल देखने को मिला।
सुव्यवस्थित परिसर, बैठने की बेहतर व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और कर्मचारियों का सहयोगी व्यवहार इस बात का प्रमाण था कि अब किसान की सुविधा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। न लंबी कतारें, न अव्यवस्था और न ही अनावश्यक प्रतीक्षा—पूरी प्रक्रिया सहज और संतोषजनक रही।

तकनीक बनी पारदर्शिता की मजबूत कड़ी

धान खरीदी के दौरान डिजिटल तौल कांटे, फोटो आधारित सत्यापन और रियल-टाइम डेटा एंट्री जैसी आधुनिक तकनीकों ने पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया। हर चरण किसान की मौजूदगी में संपन्न हुआ, जिससे किसी भी प्रकार की शंका की कोई गुंजाइश नहीं रही।
तकनीक के इस प्रभावी उपयोग से न केवल समय की बचत हुई, बल्कि किसानों का व्यवस्था के प्रति भरोसा और अधिक मजबूत हुआ।

समय पर भुगतान से बदली सोच और योजनाएं

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में दुर्गाप्रसाद ने 20.80 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। खरीदी की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध रही और भुगतान की राशि सीधे उनके बैंक खाते में समय पर जमा हो गई।
भुगतान मिलते ही उनके चेहरे पर संतोष और आत्मविश्वास साफ झलक उठा। अब वे बच्चों की शिक्षा, पारिवारिक जरूरतों और आगामी कृषि सत्र की तैयारी को लेकर पहले से कहीं अधिक निश्चिंत हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू किसान-हितैषी नीतियों की सराहना करते हुए दुर्गाप्रसाद कहते हैं कि बदली हुई धान खरीदी व्यवस्था ने किसानों के मनोबल को नई ऊंचाई दी है।
आज खेती केवल संघर्ष का प्रतीक नहीं, बल्कि सम्मानजनक, सुरक्षित और स्थायी आजीविका का भरोसेमंद माध्यम बनती जा रही है।

किसान दुर्गाप्रसाद की यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन हजारों किसानों की आवाज़ है, जो नई धान खरीदी व्यवस्था के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

 

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