एमसीबी | 23 दिसंबर 2025
भारत केवल सीमाओं में बंधा एक राष्ट्र नहीं, बल्कि एक जीवंत लोकतांत्रिक चेतना है, जिसकी आत्मा जनकल्याण, न्याय और उत्तरदायी शासन में बसती है। किसी भी लोकतंत्र की सफलता का पैमाना केवल चुनावी प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह इस बात से तय होती है कि शासन आम नागरिक के जीवन को कितना सरल, सुरक्षित और सम्मानपूर्ण बनाता है। इसी मूल भावना को सशक्त करने के उद्देश्य से हर वर्ष 25 दिसंबर को सुशासन दिवस (Good Governance Day) मनाया जाता है।
यह दिवस भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर मनाया जाता है—एक ऐसे महान नेता, जिनका संपूर्ण सार्वजनिक जीवन नैतिकता, मर्यादा और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित रहा। सुशासन दिवस न केवल स्मरण का अवसर है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को व्यवहार में उतारने का राष्ट्रीय संकल्प भी है।
अटल बिहारी वाजपेयी: सत्ता से सेवा तक का दर्शन
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन दुर्लभ नेताओं में थे, जिन्होंने सत्ता को कभी लक्ष्य नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। उनका व्यक्तित्व विचारशीलता, संवेदनशीलता और दृढ़ राष्ट्रवाद का अद्भुत संगम था। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने सहमति और संवाद की राजनीति को बढ़ावा दिया तथा शासन में गरिमा और नैतिकता की मिसाल कायम की।
पोखरण परमाणु परीक्षण से भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता को वैश्विक पहचान मिली, वहीं स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना ने देश के आर्थिक विकास को नई गति दी। ग्रामीण सड़कें, दूरसंचार विस्तार और आधारभूत ढांचे का सुदृढ़ीकरण उनके उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें विकास की रोशनी अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। यही अटल जी का सुशासन दर्शन था—समावेशी, संवेदनशील और परिणामोन्मुख शासन।
सुशासन दिवस: विचार से व्यवस्था तक
अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने 25 दिसंबर को आधिकारिक रूप से सुशासन दिवस घोषित किया। इसका उद्देश्य प्रशासनिक सुधारों को गति देना, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करना तथा नागरिकों को शासन प्रक्रिया का सहभागी बनाना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन की अवधारणा ने नए आयाम प्राप्त किए। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” एक नीतिगत वाक्य नहीं, बल्कि शासन की कार्यसंस्कृति बन चुका है।
डिजिटल इंडिया ने सेवाओं को ऑनलाइन और सुलभ बनाया, जनधन योजना ने करोड़ों लोगों को बैंकिंग से जोड़ा, उज्ज्वला योजना ने महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराया, आयुष्मान भारत ने स्वास्थ्य सुरक्षा दी और प्रधानमंत्री आवास योजना ने पक्के मकानों का सपना साकार किया। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) ने पारदर्शिता सुनिश्चित कर बिचौलियों की भूमिका समाप्त की। इन पहलों ने सुशासन को कागज़ से निकालकर जनजीवन की वास्तविकता बना दिया।
छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार: शासन जनता के द्वार
राष्ट्रीय स्तर की सुशासन भावना जब राज्य स्तर पर उतरती है, तो वह स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप और अधिक प्रभावी बन जाती है। छत्तीसगढ़ में “सुशासन तिहार” इसी विचार का सशक्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक संवेदनशीलता के मेल से शासन वास्तव में जनसेवा का माध्यम बन सकता है।
वर्ष 2025 में 8 अप्रैल से 31 मई तक आयोजित सुशासन तिहार तीन चरणों में संपन्न हुआ।
पहले चरण में ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में समाधान पेटियां और ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की गई।
दूसरे चरण में आवेदनों का विभागीय परीक्षण और निराकरण किया गया।
तीसरे चरण में समाधान शिविरों के माध्यम से मौके पर ही समस्याओं का समाधान हुआ, जहां प्रशासन स्वयं जनता के बीच उपस्थित रहा। यही सुशासन की असली पहचान है।
एमसीबी जिला: जनभागीदारी और भरोसे की मिसाल
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिला सुशासन तिहार 2025 के दौरान लोकतांत्रिक सहभागिता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा। समाधान शिविरों और ग्राम चौपालों में बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। वर्षों से लंबित पेंशन, आवास, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, किसान सम्मान निधि और छात्रवृत्ति जैसे मामलों का एक ही मंच पर समाधान हुआ।
स्वास्थ्य शिविरों में निःशुल्क जांच और दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। शिक्षा, कृषि, राजस्व, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास सहित विभिन्न विभागों ने समन्वित रूप से सेवाएं प्रदान कीं। इससे जनता में यह विश्वास मजबूत हुआ कि शासन केवल आदेश देने वाली संस्था नहीं, बल्कि उनके जीवन का सक्रिय भागीदार है।
सुशासन: लोकतंत्र की जीवंत विजय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय का लाभ गांव-गांव तक पहुंचा है। यही सुशासन दिवस और सुशासन तिहार 2025 की वास्तविक सफलता है। अटल बिहारी वाजपेयी का सपना—पारदर्शी शासन, जवाबदेह प्रशासन और अंतिम व्यक्ति तक विकास—आज तकनीक, नवाचार और मानवीय संवाद के माध्यम से साकार होता दिख रहा है।
अंततः, सुशासन दिवस और छत्तीसगढ़ का सुशासन तिहार केवल प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक चेतना का उत्सव हैं। यह सिद्ध करते हैं कि जब शासन संवेदनशील होता है, तो लोकतंत्र एक व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता का साझा उत्सव बन जाता है।





