एमसीबी | 23 दिसंबर 2025
विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का संदेश लेकर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज विश्वशांति विश्व पदयात्रा टीम छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले पहुँची। टीम में प्रमुख रूप से श्री अवध बिहारी लाल, श्री जितेंद्र प्रताप, श्री गहेंद्र प्रताप तथा डैन्जर्स एडवेंचर्स स्पोर्ट्स के सदस्य व पर्वतारोही गोविन्दा नन्द शामिल हैं।

यह टीम भारत सरकार और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से देश-विदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान चला रही है। छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में 33 जनपदों की विश्वशांति पदयात्रा एवं रथयात्रा के माध्यम से नागरिकों को सामाजिक विषयों पर जागरूक किया जा रहा है।
11 देशों में 4.52 लाख किलोमीटर की ऐतिहासिक यात्रा
विश्वशांति विश्व पदयात्रा टीम अब तक दुनिया के 11 देशों में लगभग 4 लाख 52 हजार किलोमीटर की पदयात्रा पूरी कर चुकी है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। वर्ष 2018 में टीम ने माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक सफल पदयात्रा कर एक और कीर्तिमान स्थापित किया।
इस अभियान के दौरान पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 14 करोड़ 50 लाख पौधों का वृक्षारोपण कराया गया। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों, गांवों और सार्वजनिक स्थलों पर जाकर जागरूकता कार्यक्रम, संगोष्ठियां और सामाजिक संवाद आयोजित किए गए।

देश के 600 से अधिक जनपदों में पहुँचा शांति संदेश
टीम अब तक देश के करीब 600 जनपदों में विश्वशांति पदयात्रा कर चुकी है। इसमें उत्तराखंड के 13 जनपद, उत्तर प्रदेश के 75 जनपद, मध्यप्रदेश, राजस्थान व गुजरात के सभी जनपद, दमन-दीव, गोवा तथा महाराष्ट्र के 36 जनपद शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से अब तक 28 जिलों में यह यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है।
एमसीबी जिले में टीम द्वारा 22 दिसंबर से 24 दिसंबर 2025 तक दो दिवसीय जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें विभिन्न सामाजिक विषयों पर संवाद किया जाएगा।
1980 से जारी संघर्ष और संकल्प की यात्रा
इस विश्वशांति पदयात्रा की शुरुआत 30 जुलाई 1980 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से श्री अवध बिहारी लाल ने की थी। वर्ष 2001 में वर्तमान सदस्य इस अभियान से जुड़े और आज यह एक 20 सदस्यीय टीम के रूप में कार्य कर रही है।
श्री अवध बिहारी लाल के जीवन में आई एक भीषण बाढ़ की घटना ने इस यात्रा को जन्म दिया। उस आपदा में कई घंटों तक बरगद के पेड़ से संघर्ष कर जीवन बचाने के बाद उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक चेतना के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया। इस अभियान के दौरान टीम का एक सदस्य अपने कर्तव्य पथ पर शहीद भी हो चुका है।
पर्यावरण, सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता मुख्य उद्देश्य
इस पदयात्रा के प्रमुख उद्देश्य हैं—
पर्यावरण एवं जल संरक्षण, वन व वन्यजीव सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण, सड़क सुरक्षा, स्वच्छ भारत अभियान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और मतदाता जागरूकता।
टीम इन विषयों पर स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक मंचों पर लोगों को जागरूक कर रही है।
विश्वशांति विश्व पदयात्रा आज न केवल एक अभियान, बल्कि सामाजिक चेतना और वैश्विक शांति का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।





