एमसीबी | हेल्थ अपडेट
मनेंद्रगढ़ में संचालित 220 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आज MCB जिले के लोगों के लिए इलाज का ही नहीं, बल्कि विश्वास और सुरक्षा का केंद्र बन चुका है। जिस अस्पताल को कभी लोग मजबूरी में चुनते थे, अब वहीं अस्पताल स्वेच्छा से पहली पसंद बनता जा रहा है। व्यवस्थाओं में आए सुधार और सेवाओं की गुणवत्ता ने इसकी छवि पूरी तरह बदल दी है।
सरकारी अस्पताल में दिखा निजी संस्थानों जैसा अनुशासन
अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, वार्डों की सुव्यवस्था और समय पर इलाज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थान भी उच्च मानकों पर काम कर सकते हैं। मरीजों को अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता और उन्हें सम्मानजनक व्यवहार के साथ उपचार मिल रहा है, जिससे अस्पताल के प्रति धारणा में बड़ा बदलाव आया है।
स्वास्थ्य मंत्री की सोच, ज़मीन पर दिखा असर
प्रदेश सरकार की मंशा है कि आम नागरिकों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े। इसी सोच के तहत स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में जिले के अस्पतालों में सुविधाओं का विस्तार और सेवाओं की निगरानी की जा रही है। मनेंद्रगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इसका सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।
अधीक्षक के नेतृत्व में बदली अस्पताल की कार्यसंस्कृति
अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी के नेतृत्व में यहां व्यवस्थागत सुधारों को प्राथमिकता दी गई। दवाओं की उपलब्धता, स्टाफ की जवाबदेही और मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार को सख्ती से लागू किया गया। इसका असर यह हुआ कि अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
जब डॉक्टर खुद मरीज के पास पहुंचे
अस्पताल में कई मामलों में अधीक्षक स्वयं मरीजों का उपचार कर रहे हैं, जिससे लोगों को यह भरोसा मिला है कि यहां केवल सिस्टम नहीं, बल्कि संवेदनशील इंसान भी मौजूद हैं। डॉ. तिवारी के अनुसार, उनका लक्ष्य है कि कोई भी मरीज इलाज के अभाव में या असंतोष के साथ वापस न जाए।
आपात सेवाओं में भी राहत
अस्पताल में दिन-रात डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों और आकस्मिक स्थितियों में मरीजों को तुरंत उपचार मिल रहा है। यह सुविधा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के लिए विशेष रूप से राहतकारी साबित हो रही है।
दो महीनों में हजार से अधिक गंभीर मरीजों का इलाज
नवंबर-दिसंबर 2025 के दौरान अस्पताल में 1003 मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया गया। इनमें प्रसव संबंधी मामले, एनीमिया, सड़क दुर्घटनाएं, सर्पदंश, जहर सेवन, जलने, आत्मघाती प्रयास और वन्यजीव हमलों से जुड़े गंभीर केस शामिल रहे।
भरोसे का केंद्र बनता सरकारी स्वास्थ्य तंत्र
आज मनेंद्रगढ़ का 220 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केवल एक भवन नहीं, बल्कि सरकार की प्रतिबद्धता, प्रशासन की मेहनत और चिकित्सा सेवा की संवेदनशीलता का प्रतीक बन चुका है। यह अस्पताल साबित कर रहा है कि जब नीति, नेतृत्व और ज़मीन पर काम एक साथ चलते हैं, तो सरकारी व्यवस्था भी लोगों की उम्मीदों पर खरी उतर सकती है।





